चिरह कला पंचायत में लाखों के भुगतानों पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल, बोले- दस्तावेज खुलेंगे तो सामने आएगा पूरा सच टैक्स वसूली से लेकर मजदूरी, सफाई, नाली-पुलिया निर्माण और पंच मानदेय तक के भुगतान जांच के घेरे में

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चिरह कला पंचायत में लाखों के भुगतानों पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल, बोले- दस्तावेज खुलेंगे तो सामने आएगा पूरा सच

टैक्स वसूली से लेकर मजदूरी, सफाई, नाली-पुलिया निर्माण और पंच मानदेय तक के भुगतान जांच के घेरे में; एक ही बिल के दो भुगतान का आरोप, कई भुगतानों की जमीनी हकीकत पर भी सवाल

गाडरवारा। ग्राम पंचायत चिरह कला में वर्ष 2022 से अब तक टैक्स वसूली और पंचायत निधि से किए गए विभिन्न भुगतानों को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में मजदूरी, साफ-सफाई, नाली निर्माण, नाडेप, मच्छररोधी दवा, पुलिया निर्माण, पंच मानदेय सहित अलग-अलग मदों में लाखों रुपये के भुगतान किए गए हैं, लेकिन इनमें से कई भुगतानों के पीछे वास्तविक कार्य और खर्च की स्थिति स्पष्ट नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के मूल रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, भुगतान वाउचर, मस्टर रोल, माप पुस्तिका और जियो-टैग फोटो-वीडियो की निष्पक्ष जांच हो जाए तो पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

ग्रामीणों के अनुसार पंचायत के उपलब्ध भुगतान विवरणों में आदित्य कंप्यूटर के नाम से बिल क्रमांक 76 और 77 को लेकर विशेष सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि एक ही बिल से संबंधित प्रविष्टि का दो बार भुगतान किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक ही बिल के आधार पर दोहरा भुगतान प्रमाणित होता है तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला होगा और इसकी जिम्मेदारी तय होना चाहिए।

इसी तरह सुखराम धानक के नाम पर 25 अप्रैल 2026 को 95 हजार रुपए और 5 जून 2026 को 26 हजार रुपए, यानी कुल 1.21 लाख रुपए के भुगतान का उल्लेख सामने आने के बाद भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार जिस कार्य या मजदूरी के नाम पर यह राशि जारी की गई, उसकी वास्तविकता की जांच होना जरूरी है। वहीं सुखराम धानक द्वारा आरोप लगाया गया है कि उन्होंने पंचायत में न तो साफ-सफाई का काम किया और न ही किसी अन्य प्रकार का कार्य किया, इसके बावजूद उनके खाते में राशि डाली गई और बाद में सरपंच एवं सचिव द्वारा वह राशि वापस ले ली गई।

ग्रामीणों ने बालकृष्ण प्रजापति के नाम वर्ष 2025 से 2026 के बीच किए गए विभिन्न भुगतानों पर भी सवाल उठाए हैं। उपलब्ध विवरणों के अनुसार साफ-सफाई, नाडेप, नाली सफाई, मच्छररोधी दवा और नाली निर्माण जैसे कार्यों के नाम पर अलग-अलग भुगतानों के माध्यम से लगभग 1,75,500 रुपए की राशि का भुगतान दर्ज बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इन कार्यों की वास्तविकता केवल कागजों से नहीं बल्कि मौके पर जाकर देखी जानी चाहिए।

पंचायत में पंच मानदेय की राशि के भुगतान को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। बताया जा रहा है कि 10 अक्टूबर 2025 को 31,350 रूपए का भुगतान किया गया तथा पंचों के मानदेय की राशि एक खाते के माध्यम से भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि कई पंचों का मानदेय एक ही खाते में भेजा गया तो इसके पीछे क्या प्रक्रिया अपनाई गई और संबंधित पंचों को उनका मानदेय किस प्रकार प्राप्त हुआ। इस पूरे मामले की पुष्टि पंचों के खातों से की जाना चाहिए।

वहीं हाई स्कूल के पास पुलिया निर्माण को लेकर भी ग्रामीणों ने रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया निर्माण के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई, तकनीकी स्वीकृति क्या थी, कार्य की लागत कितनी थी, कितनी राशि का भुगतान हुआ और मौके पर वास्तविक निर्माण कितना हुआ—इन सभी बिंदुओं की जांच भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में यदि सभी भुगतान नियमानुसार और वास्तविक कार्यों के आधार पर किए गए हैं तो पंचायत को संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। वहीं यदि किसी भुगतान के पीछे वास्तविक कार्य नहीं हुआ, एक ही बिल से दोहरा भुगतान हुआ, मस्टर रोल में ऐसे लोगों के नाम दर्ज हैं जिन्होंने काम नहीं किया या भुगतान और मौके के कार्य में अंतर मिलता है, तो इसकी जिम्मेदारी तय कर संबंधित राशि की वसूली और नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

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Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।