37 दिन चले धरने की समाप्ति के बाद मामले में नया मोड़ जनपद सीईओ की शिकायत पर कार्यालय में तालाबंदी और शासकीय कार्य में बाधा का मामला दर्ज
- bySatendra Mishra
- 20 Aug 2026, 08:26 PM
- 10 Mins
37 दिन चले धरने की समाप्ति के बाद मामले में नया मोड़
जनपद सीईओ की शिकायत पर कार्यालय में तालाबंदी और शासकीय कार्य में बाधा का मामला दर्ज
वरिष्ठ उपाध्यक्ष मप्र युवा कांग्रेस अभिषेक परमार समेत चार नामजद, 18 अगस्त को दोपहर 1 से शाम 5 बजे तक कार्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी का आरोप
गाडरवारा। चिचली जनपद पंचायत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी को हटाने की मांग को लेकर करीब 37 दिनों तक चले धरना-प्रदर्शन और आंदोलन के समाप्त होने के बाद अब मामले में नया मोड़ सामने आया है। जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की शिकायत पर चिचली थाना पुलिस ने जनपद पंचायत कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर कथित रूप से ताला लगाने, अधिकारियों-कर्मचारियों को कार्यालय से बाहर निकलने से रोकने तथा शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में कमलेश अहिरवार, अभिषेक परमार, मनीष अहिरवार और रियाज खान को नामजद किया गया है। इनमें अभिषेक परमार को मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में बताया जा रहा है। मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 221, धारा 3(5) एवं धारा 127(6) के तहत अपराध क्रमांक 0272/2026 दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है।
18 अगस्त को तालाबंदी का आरोप
एफआईआर में दर्ज जानकारी के अनुसार घटना 18 अगस्त 2026 को दोपहर लगभग 1 बजे से शाम 5 बजे के बीच की बताई गई है। शिकायत के मुताबिक जनपद पंचायत कार्यालय बाई चिचली के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर कमलेश अहिरवार, अभिषेक परमार, मनीष अहिरवार, रियाज खान सहित अन्य लोग मौजूद थे। आरोप है कि इसी दौरान कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला लगा दिया गया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि ताला लगाए जाने के कारण कार्यालय में मौजूद अधिकारी एवं कर्मचारियों को बाहर निकलने में परेशानी हुई और करीब चार घंटे तक शासकीय कामकाज प्रभावित रहा। शिकायतकर्ता ने इस घटना को शासकीय कार्य में बाधा बताते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की।
आंदोलन के बाद एफआईआर से बढ़ा राजनीतिक तापमान
चिचली जनपद पंचायत में लंबे समय से चल रहे आंदोलन के दौरान जनपद अध्यक्ष सहित कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं द्वारा विभिन्न मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया जा रहा था। करीब 37 दिनों तक चले इस आंदोलन के बाद जनपद सीईओ को हटाए जाने के पश्चात धरना समाप्त होने की जानकारी सामने आई थी। आंदोलन समाप्त होने के बाद अब उसी आंदोलन से जुड़े प्रदर्शन और तालाबंदी को लेकर पुलिस कार्रवाई सामने आने से मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
एक ओर आंदोलन समाप्त होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर विवाद को शांत होने की उम्मीद थी, वहीं दूसरी ओर सीईओ की शिकायत पर दर्ज हुई एफआईआर ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। अब पुलिस जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि कार्यालय में वास्तव में किन परिस्थितियों में तालाबंदी हुई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और शासकीय कार्य कितनी देर तक प्रभावित हुआ।
रात में दर्ज हुई प्राथमिकी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार घटना की सूचना थाना चिचली में 18 अगस्त की रात 10:36 बजे प्राप्त हुई। इसके बाद जनरल डायरी में प्रविष्टि क्रमांक 015 दर्ज की गई और रात करीब 10:41 बजे एफआईआर दर्ज की गई।
एफआईआर में घटना स्थल के रूप में जनपद पंचायत कार्यालय, चिचली का उल्लेख है। पुलिस रिकॉर्ड में थाना चिचली से घटना स्थल की दिशा उत्तर तथा दूरी लगभग एक किलोमीटर दर्ज की गई है।
चार लोगों के नाम एफआईआर में दर्ज
पुलिस दस्तावेज में आरोपी/संदिग्ध के रूप में चार नाम दर्ज हैं—
- कमलेश अहिरवार
- अभिषेक परमार
- मनीष अहिरवार
- रियाज खान
एफआईआर में इन लोगों के साथ अन्य लोगों की मौजूदगी का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है। हालांकि अन्य व्यक्तियों के संबंध में पुलिस जांच के दौरान तथ्य सामने आने की संभावना है।
जांच में सामने आएगी पूरी तस्वीर
मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस द्वारा शिकायतकर्ता के बयान, कार्यालय में मौजूद अधिकारी-कर्मचारियों के बयान, मौके की स्थिति, तालाबंदी से जुड़े साक्ष्य, उपलब्ध वीडियो फुटेज तथा अन्य तथ्यों की जांच की जा सकती है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना में किसकी क्या भूमिका रही और लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है।
गौरतलब है कि एफआईआर में दर्ज आरोप अभी आरोप मात्र हैं और उनकी पुष्टि पुलिस जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। नामजद व्यक्तियों का दोष सिद्ध होना अभी शेष है।
37 दिन के आंदोलन के बाद अब पुलिस कार्रवाई पर निगाह
चिचली जनपद पंचायत का विवाद पिछले कई दिनों से राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बना हुआ था। लंबे धरने के बाद आंदोलन समाप्त होने और अब तालाबंदी के मामले में
एफआईआर दर्ज होने से घटनाक्रम एक बार फिर सुर्खियों में है। अब सभी की नजर पुलिस की आगामी जांच और कार्रवाई पर है। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि मामले में नामजद पक्ष की ओर से इस घटना और एफआईआर को लेकर क्या पक्ष सामने आता है।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
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