बोहानी नवोदय विद्यालय में गंभीर आरोपों की जांच,

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बोहानी नवोदय विद्यालय में गंभीर आरोपों की जांच, मुख्यालय की टीम ने दर्ज किए पीड़ित पक्ष के बयान

समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित खबरों को संज्ञान में लेकर मुख्यालय स्तर पर गठित हुई जांच टीम • बच्ची, परिजन, कर्मचारियों एवं अन्य पक्षों से पूछताछ जारी • जांच पूरी होने तक मीडिया को आधिकारिक जानकारी देने से टीम ने किया इनकार

नरसिंहपुर। पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय बोहानी में प्राचार्य पर लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर बुधवार 19 अगस्त को मुख्यालय स्तर से गठित जांच टीम विद्यालय पहुंची। टीम द्वारा पीड़ित बच्ची एवं उसके परिजनों के बयान दर्ज किए जाने के साथ ही विद्यालय के कर्मचारियों तथा अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच के चलते विद्यालय परिसर में सुरक्षा एवं गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा गया तथा मीडिया कर्मियों एवं ग्रामीणों को परिसर के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।

जांच टीम के सदस्य से हुई बातचीत

जांच के संबंध में जांच टीम के सदस्य श्री त्रिपाठी से संपर्क किए जाने पर उन्होंने बताया कि समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित खबरों को ध्यान में रखते हुए नवोदय विद्यालय बोहानी के प्राचार्य पर लगाए गए आरोपों की जांच के लिए मुख्यालय स्तर से टीम गठित की गई है।

उन्होंने बताया कि टीम विद्यालय पहुंच चुकी है और पीड़ित पक्ष, बच्ची एवं उसके परिजनों के कथन दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा विद्यालय के कर्मचारियों एवं अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

श्री त्रिपाठी के अनुसार वर्तमान में जांच प्रक्रिया चल रही है, इसलिए जांच के संबंध में मीडिया के समक्ष विस्तृत जानकारी देना संभव नहीं है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार जांच की जा रही है तथा जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट वरिष्ठ कार्यालय को सौंपी जाएगी। इसके पश्चात सक्षम अधिकारी ही मीडिया के समक्ष जांच से संबंधित जानकारी रखने के लिए अधिकृत होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे व्यक्तिगत रूप से जांच का पक्ष रखने के लिए अधिकृत नहीं हैं।

जांच की गोपनीयता को लेकर उठे सवाल

जांच के दौरान विद्यालय परिसर के सभी प्रवेश द्वार बंद रखे जाने तथा मीडिया कर्मियों एवं स्थानीय लोगों को अंदर प्रवेश नहीं दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसके चलते जांच प्रक्रिया को लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि जांच की संवेदनशीलता एवं पीड़ित बच्ची की निजता को देखते हुए जांच एजेंसी द्वारा मीडिया को जांच स्थल से दूर रखना आवश्यक प्रक्रिया का हिस्सा भी हो सकता है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच के संबंध में कम से कम आधिकारिक स्तर पर तथ्यात्मक जानकारी समय-समय पर सार्वजनिक की जानी चाहिए, जिससे अफवाहों पर रोक लग सके।

पूर्व प्राचार्य की गतिविधियों को लेकर भी चर्चा

स्थानीय एवं विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आ रही है कि पूर्व में पद से हटाकर भोपाल मुख्यालय अटैच किए गए तत्कालीन प्राचार्य अरुण तिवारी के बोहानी एवं आसपास क्षेत्र में आवागमन को लेकर भी चर्चा है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

इसी कारण स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि यदि जांच को पूरी तरह निष्पक्ष एवं संदेह से परे रखना है तो जांच अवधि के दौरान संबंधित अधिकारी की गतिविधियों की भी विभागीय स्तर पर स्पष्टता की जाए। कुछ स्थानीय लोगों ने तो यहां तक मांग की है कि 19 अगस्त 2026 को उनकी दिनभर की गतिविधियों तथा आवश्यक होने पर मोबाइल लोकेशन एवं कॉल डिटेल रिकॉर्ड की वैधानिक प्रक्रिया के तहत जांच की जाए, ताकि किसी प्रकार के संभावित प्रभाव अथवा संपर्क को लेकर उठ रहे सवालों की वास्तविकता सामने आ सके।

जांच प्रभावित करने की आशंकाओं पर भी चर्चा

इस बीच कुछ विश्वसनीय सूत्रों द्वारा यह दावा किए जाने की चर्चा भी क्षेत्र में है कि जांच को प्रभावित करने के लिए कथित रूप से आर्थिक लेन-देन अथवा अन्य माध्यमों का सहारा लिए जाने का प्रयास किया जा सकता है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

इस तरह के गंभीर दावों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। इसलिए बिना प्रमाण किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। यदि इस प्रकार के किसी प्रयास के ठोस प्रमाण सामने आते हैं तो संबंधित जांच एजेंसी द्वारा उसकी भी स्वतंत्र जांच किया जाना आवश्यक होगा।

बच्ची के बयान को लेकर भी सामने आई जानकारी

आंतरिक स्तर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित बच्ची ने जांच टीम के समक्ष अपने आरोपों को दोहराते हुए कथित घटना के संबंध में बयान दर्ज कराया है। सूत्रों का दावा है कि बच्ची ने जांच टीम के समक्ष गंभीर आरोप लगाए हैं।

हालांकि पीड़ित बच्ची नाबालिग है, इसलिए उसकी पहचान अथवा ऐसी कोई जानकारी प्रकाशित करना उचित नहीं है जिससे उसकी पहचान उजागर हो। उसके बयान एवं आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच रिपोर्ट तथा सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्ष के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

निष्पक्ष जांच की मांग

पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर है। एक ओर विभागीय टीम द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर जांच किए जाने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर जांच को प्रभावित किए जाने की आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं।

ऐसे में आवश्यक है कि जांच टीम सभी संबंधित पक्षों के बयान स्वतंत्र रूप से दर्ज करे, उपलब्ध दस्तावेजों एवं अन्य साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच करे तथा किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव से मुक्त रहकर अपनी रिपोर्ट वरिष्ठ कार्यालय को सौंपे।

फिलहाल जांच जारी है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सत्यता है और मामले में विभागीय स्तर पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

नोट: यह समाचार उपलब्ध जानकारी एवं संबंधित सूत्रों के दावों पर आधारित है। जिन आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, उन्हें आरोप/दावा के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। पीड़ित बच्ची की पहचान की गोपनीयता बनाए रखना आवश्यक है।

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।