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*कोयला खदान की ब्लास्टिंग से ग्रामीण परेशान, मकानों में नुकसान और धूल से बीमारी फैलने का आरोप* गोटिटोरिया के ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई गुहार, अत्यधिक खुदाई व ब्लास्टिंग पर नियंत्रण की मांग;

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*कोयला खदान की ब्लास्टिंग से ग्रामीण परेशान, मकानों में नुकसान और धूल से बीमारी फैलने का आरोप*

गोटिटोरिया के ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई गुहार, अत्यधिक खुदाई व ब्लास्टिंग पर नियंत्रण की मांग; गिरते जलस्तर से कृषि कार्य भी प्रभावित होने का दावा

गाडरवारा। तहसील गाडरवारा अंतर्गत ग्राम गोटिटोरिया में संचालित कोयला खदान को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर शिकायतें उठाई हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर नरसिंहपुर को आवेदन सौंपकर आरोप लगाया है कि खदान में अत्यधिक खुदाई और ब्लास्टिंग के कारण आसपास के रहवासियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने खदान का औचक निरीक्षण कर ब्लास्टिंग और खुदाई गतिविधियों पर नियमानुसार नियंत्रण की मांग की है।

ग्रामीणों द्वारा 30 जून 2026 को दिए गए आवेदन के अनुसार ग्राम गोटिटोरिया में स्थित बोल्डर स्टोन कोयला खदान संचालित है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि खदान में होने वाली ब्लास्टिंग से आसपास के मकानों को नुकसान पहुंच रहा है। वहीं ब्लास्टिंग और खनन के दौरान उड़ने वाली धूल से ग्रामीणों को सांस लेने में परेशानी हो रही है।

धूल से दमा फैलने का आरोप, बच्चे-बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं परेशान

आवेदन में ग्रामीणों ने दावा किया है कि लगातार उड़ने वाली धूल के कारण गांव में दमा जैसी श्वसन संबंधी बीमारी तेजी से फैल रही है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को सांस लेने में अधिक परेशानी होने की बात कही गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि खदान के नजदीक बसे परिवारों को ब्लास्टिंग के दौरान कंपन और धूल दोनों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में ग्रामीणों ने प्रशासन से यह जांच कराने की मांग की है कि खदान में ब्लास्टिंग निर्धारित मानकों और सुरक्षा नियमों के अनुरूप हो रही है या नहीं।

अत्यधिक खुदाई से जलस्तर गिरने का भी आरोप

शिकायत में एक और गंभीर मुद्दा भू-जल स्तर को लेकर उठाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कोयला खदान में अत्यधिक खुदाई किए जाने के कारण गांव का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। इसका असर नलकूपों, कुओं और तालाबों पर दिखाई देने तथा पानी की उपलब्धता लगातार कम होने का दावा किया गया है।

ग्रामीणों के मुताबिक पानी की कमी से कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहा है। आने वाले समय में पानी की समस्या और गंभीर होने की आशंका भी आवेदन में जताई गई है।

पहले भी की शिकायत, कार्रवाई नहीं होने का आरोप

आवेदन में ग्रामीणों ने यह भी कहा है कि इस समस्या को लेकर पूर्व में अनुविभागीय अधिकारी गाडरवारा को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन शिकायतकर्ताओं के अनुसार अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद ग्रामीणों ने सीधे कलेक्टर नरसिंहपुर के समक्ष अपनी समस्या रखी है।

आवेदन पर 30 जून 2026 को जनसुनवाई में प्राप्त होने की मुहर भी दिखाई दे रही है।

ग्रामीणों की मांग—खदान का हो औचक निरीक्षण

ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि संबंधित कोयला खदान का प्रशासनिक एवं तकनीकी अधिकारियों की टीम से औचक निरीक्षण कराया जाए। साथ ही यह जांच की जाए कि कितनी मात्रा और किस निर्धारित सीमा में ब्लास्टिंग की जा रही है तथा खनन और खुदाई स्वीकृत नियमों के अनुरूप है या नहीं।

ग्रामीणों ने ब्लास्टिंग से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित कराने, सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने तथा खदान से ग्रामीणों को हो रही कथित परेशानियों से निजात दिलाने के लिए ठोस कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल आवेदन में लगाए गए आरोप ग्रामीणों के पक्ष के आधार पर हैं। खदान प्रबंधन एवं संबंधित विभाग का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।