तबादला आदेश के 8 माह बाद भी कुर्सी पर जमे सहायक! सिविल सप्लाइज में ‘बारदाना–परिवहन’ पर गंभीर सवाल, मुख्यालय ने बैठाई जांच नर्मदापुरम जिला कार्यालय में पदस्थ सहायक रूप कुमरे के खिलाफ शिकायत पर भोपाल मुख्यालय सख्त;
- bySatendra Mishra
- 03 Aug 2026, 06:17 PM
- 13 Mins
तबादला आदेश के 8 माह बाद भी कुर्सी पर जमे सहायक! सिविल सप्लाइज में ‘बारदाना–परिवहन’ पर गंभीर सवाल, मुख्यालय ने बैठाई जांच
नर्मदापुरम जिला कार्यालय में पदस्थ सहायक रूप कुमरे के खिलाफ शिकायत पर भोपाल मुख्यालय सख्त; क्षेत्रीय प्रबंधक को बिंदुवार जांच कर शीघ्र रिपोर्ट भेजने के निर्देश
शिकायत में सीएमआर चावल मिलिंग के बारदाने में कथित गड़बड़ी, रैक परिवहन में मनमानी और अनधिकृत हस्तक्षेप जैसे गंभीर आरोप; दोष सिद्ध होने पर कड़ी कार्रवाई की मांग
भोपाल। मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के नर्मदापुरम जिला कार्यालय से जुड़ा एक मामला अब भोपाल मुख्यालय तक पहुंच गया है। सहायक रूप कुमरे के विरुद्ध स्थानांतरण आदेश के कथित उल्लंघन, सीएमआर चावल मिलिंग में बारदाने से जुड़ी कथित अनियमितताओं, परिवहन व्यवस्था में मनमानी तथा विभागीय कार्यों में अनधिकृत हस्तक्षेप जैसे गंभीर आरोपों वाली शिकायत पर निगम मुख्यालय ने संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। 03 अगस्त 2026 को महाप्रबंधक (स्थापना) द्वारा क्षेत्रीय प्रबंधक, मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड, नर्मदापुरम को पत्र जारी कर शिकायत की बिंदुवार जांच कर जांच प्रतिवेदन शीघ्र मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि प्रकरण में आगे की कार्रवाई की जा सके।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि शिकायत में दावा किया गया है कि संबंधित कर्मचारी का स्थानांतरण मुख्यालय भोपाल के आदेश क्रमांक स्थापना/20715/2025/2678, दिनांक 12 अगस्त 2025 के माध्यम से किया जा चुका था। उपलब्ध आदेश के अनुसार सहायक रूप कुमरे को कार्य आवश्यकता के दृष्टिगत प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित करते हुए आगामी आदेश तक जिला कार्यालय हरदा में पदस्थ किया गया था और आदेश को तत्काल प्रभावशील बताया गया था। इसके बावजूद शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के लगभग आठ माह बाद भी संबंधित कर्मचारी नर्मदापुरम जिला कार्यालय में प्रभाव बनाए रखते हुए विभागीय कार्यों में हस्तक्षेप कर रहा है। हालांकि इन आरोपों की सत्यता अब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
*बारदाने के आंकड़ों पर बड़ा सवाल—शिकायत में 40% पुराने और 60% नए का दावा*
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप सीएमआर चावल मिलिंग वर्ष 2024-25 के बारदाने को लेकर लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि मुख्यालय के निर्देशानुसार नवीन बारदाने में चावल भंडारण किया जाना था, लेकिन वास्तविक स्तर पर कथित रूप से लगभग 40 प्रतिशत पुराने एवं 60 प्रतिशत नए बारदाने में चावल संग्रहित किया गया, जबकि शिकायत के मुताबिक NIC पोर्टल पर शत-प्रतिशत नया बारदाना दर्शाए जाने की आशंका व्यक्त की गई है। शिकायतकर्ता ने इसे मिलर्स के साथ कथित मिलीभगत कर आर्थिक लाभ अर्जित करने और शासन को वित्तीय क्षति पहुंचाने की संभावना से जोड़ते हुए इसकी भौतिक जांच और ऑडिट कराने की मांग की है। यह आरोप बेहद गंभीर प्रकृति का है, लेकिन इसे अभी जांच में प्रमाणित किया जाना शेष है।
*रेल रैक परिवहन में भी नियमों की अनदेखी का आरोप*
शिकायत में दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा रेल रैक परिवहन व्यवस्था का उठाया गया है। आरोप है कि निर्धारित गोदामों से उठाव करने के बजाय कथित तौर पर लाभकारी अथवा नजदीकी गोदामों को प्राथमिकता देकर उठाव कराया गया, जिससे निर्धारित प्रक्रिया के उल्लंघन और पक्षपात की आशंका पैदा होती है। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो परिवहन व्यवस्था से जुड़े निर्णय, अनुमतियां और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ सकती है।
इसी प्रकार शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नजदीकी केंद्र से परिवहन कराने के स्थान पर दूसरे केंद्र से परिवहन कराकर अनावश्यक दूरी बढ़ाई गई, जिससे निगम को अतिरिक्त वित्तीय भार उठाना पड़ सकता है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे बदलाव कथित रूप से सक्षम अनुमति एवं आवश्यक पत्राचार के बिना किए गए और पूरे मामले में कमीशनखोरी की आशंका व्यक्त की है। इन आरोपों की पुष्टि अथवा खंडन अब रिकॉर्ड, परिवहन बिल, स्वीकृतियों और संबंधित दस्तावेजों की जांच से होगा।
*स्थानांतरण के बाद भी हस्तक्षेप? मुख्यालय के आदेश पर उठे सवाल*
पूरे मामले का सबसे बड़ा प्रशासनिक सवाल यही है कि यदि 12 अगस्त 2025 को संबंधित कर्मचारी का स्थानांतरण हरदा कर दिया गया था, तो उसके बाद नर्मदापुरम कार्यालय के कामकाज में उसकी भूमिका क्या रही? शिकायत में उपार्जन, LRT, सड़क मार्ग परिवहन, रेलवे रैक संचालन सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया गया है। ऐसे में जांच का महत्वपूर्ण बिंदु यह भी होगा कि स्थानांतरण आदेश का वास्तविक पालन कब और किस स्तर पर हुआ तथा यदि कर्मचारी नर्मदापुरम से जुड़े कार्यों में शामिल रहा तो वह किस सक्षम आदेश अथवा अधिकार के तहत था।
अब निगम मुख्यालय का 03 अगस्त 2026 का पत्र इस प्रकरण को नया मोड़ देता दिखाई दे रहा है। महाप्रबंधक (स्थापना) ने क्षेत्रीय प्रबंधक नर्मदापुरम को शिकायत का बिंदुवार परीक्षण कर शीघ्र जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा है। पत्र की प्रतिलिपि जिला प्रबंधक, मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड, नर्मदापुरम को भी भेजी गई है।
*शिकायतकर्ता ने मांगी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच*
शिकायत में पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने, NIC पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों और वास्तविक भंडारण का भौतिक सत्यापन एवं ऑडिट कराने, परिवहन तथा रैक संचालन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच करने और दोष प्रमाणित होने पर संबंधित कर्मचारी एवं अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा सेवा नियमों के तहत कार्रवाई करने की मांग की गई है। साथ ही भविष्य में ऐसी कथित अनियमितताओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था लागू करने की भी मांग उठाई गई है।
*अब जांच रिपोर्ट खोलेगी परतें—आरोप सही या शिकायत निराधार?*
फिलहाल उपलब्ध दस्तावेज यह स्थापित करते हैं कि सहायक रूप कुमरे का 12 अगस्त 2025 को हरदा स्थानांतरण आदेश जारी हुआ था और 03 अगस्त 2026 को मुख्यालय ने उनके संबंध में प्राप्त शिकायत की बिंदुवार जांच कर रिपोर्ट मांगी है। वहीं बारदाना घोटाले, परिवहन में अनियमितता, मिलीभगत, आर्थिक नुकसान और भ्रष्टाचार से संबंधित बातें शिकायत में लगाए गए आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के अधीन है। ऐसे में अब निगाहें क्षेत्रीय स्तर पर होने वाली जांच और मुख्यालय को भेजी जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच से ही साफ होगा कि विभागीय व्यवस्था में वास्तव में नियमों को ताक पर रखा गया या शिकायत में लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
