कोडिया (गाडरवारा)शिकायतों के बाद भी नहीं टूटी चुप्पी, अधिकारियों की उदासीनता के बीच पंचायत सचिव की मनमानी बेलगाम फोन पर सूचना, लगातार शिकायतें और खबरों के प्रकाशन के बाद भी कार्रवाई शून्य 10 दिन बीत जाने के बाद भी नहीं जांच के आदेश..
- bySatendra Mishra
- 20 Apr 2026, 05:00 PM
- 6 Mins
कौडिया गाडरवारा शिकायतों के बाद भी नहीं टूटी चुप्पी, अधिकारियों की उदासीनता के बीच पंचायत सचिव की मनमानी बेलगाम
फोन पर सूचना, लगातार शिकायतें और खबरों के प्रकाशन के बाद भी कार्रवाई शून्य
10 दिन बीत जाने के बाद भी नहीं जांच के आदेश : अनियमितताओं में संरक्षण
गाडरवारा। ग्राम पंचायत कौड़ियां में पंचायत सचिव की कथित मनमानी और प्रशासनिक उदासीनता अब ग्रामीणों के गुस्से का बड़ा कारण बन चुकी है। लगातार शिकायतें, फोन पर अधिकारियों को सूचना और समाचार पत्रों में खबरों के प्रकाशन के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी अब तक मौन बैठे हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पूरी तरह बदहाल हो चुकी है। मुख्य मार्गों से लेकर अंदरूनी गलियों तक गंदगी का अंबार लगा हुआ है, लेकिन पंचायत सचिव पर कोई अंकुश दिखाई नहीं दे रहा। ग्रामीणों का कहना है कि जब बार-बार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह लापरवाही नहीं बल्कि संरक्षण की स्थिति प्रतीत होती है।
ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत में सफाई मद के नाम पर खर्च तो लगातार दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। गांव के प्रवेश मार्ग, स्टेट हाईवे किनारे और वार्डों में फैली गंदगी साफ संकेत देती है कि सफाई व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है। सूत्रों के अनुसार, पंचायत में कार्यरत सफाई कर्मचारियों का 4 से 5 माह का वेतन भी लंबित बताया जा रहा है। यदि यह तथ्य सही है, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जनहित के साथ सीधा अन्याय है। कर्मचारियों को समय पर भुगतान न होने से नियमित सफाई कार्य प्रभावित होना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने पिछले पांच वर्षों में पंचायत सचिव द्वारा कराए गए विकास कार्यों—सड़क, नाली, स्वच्छता, पंचायत भवन, जल निकासी एवं अन्य निर्माण कार्यों—का भौतिक सत्यापन और वित्तीय ऑडिट कराने की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि रिकॉर्ड और जमीन पर हुए कार्यों का मिलान होते ही वास्तविकता सामने आ जाएगी।
जनहित की खबर समाचार पत्र में प्रमुखता से प्रकाशित होते ही पंचायत भवन के सामने पड़ी गंदगी को हटाने का काम शुरू कराया गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि समस्या पहले से मौजूद थी, लेकिन जिम्मेदारों ने जानबूझकर आंखें मूंद रखी थीं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि प्रशासन अब भी मौन रहा, तो इसे केवल लापरवाही नहीं बल्कि भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण माना जाएगा। लोगों ने मांग की है कि मामले में उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि शासन की योजनाएं कागजों से निकलकर वास्तव में जनता तक पहुंच सकें।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
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