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नरसिंगपुर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर दो बड़े सवाल : प्रसूता से कथित अवैध वसूली और नवजात को चूहे के काटने की घटना से मचा हड़कंप मुफ्त इलाज के दावों पर उठे सवाल

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सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर दो बड़े सवाल : प्रसूता से कथित अवैध वसूली और नवजात को चूहे के काटने की घटना से मचा हड़कंप

मुफ्त इलाज के दावों पर उठे सवाल — ऑपरेशन के नाम पर ₹3500 लेने का आरोप, प्रसूति वार्ड में नवजात की सुरक्षा पर भी गंभीर चिंता

नरसिंहपुर/गाडरवारा। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। लेकिन नरसिंहपुर जिले के शासकीय अस्पतालों से सामने आए दो अलग-अलग गंभीर मामलों ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर प्रसूता से ऑपरेशन और उपचार के नाम पर कथित रूप से अवैध धनराशि वसूलने का आरोप लगा है, वहीं दूसरी ओर शासकीय सिविल अस्पताल गाडरवारा के प्रसूति वार्ड में एक नवजात बच्ची को कथित रूप से चूहे द्वारा काटे जाने की घटना ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

*प्रसूता से कथित अवैध वसूली का आरोप, ₹3500 लेने की शिकायत*

ग्राम टिमरावन निवासी कपिल लोधी ने जिला कलेक्टर नरसिंहपुर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नरसिंहपुर को सौंपे शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि दिनांक 2 जून 2026 को उनकी पत्नी प्रीति वर्मा को प्रसव पीड़ा होने पर पहले शासकीय सिविल अस्पताल गाडरवारा ले जाया गया था। आरोप है कि वहां डॉ अमित जी अवकाश पर थे। एनेस्थीसिया इंजेक्शन लगाने की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें जिला चिकित्सालय नरसिंहपुर रेफर किया गया। शिकायत के अनुसार जिला चिकित्सालय में रात लगभग 11 बजे ऑपरेशन के माध्यम से प्रसव कराया गया, लेकिन इस दौरान कथित रूप से डॉक्टर एवं संबंधित स्टाफ द्वारा पैसों की मांग की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ऑपरेशन डिलीवरी के नाम पर डॉक्टर एस.एस. पटेल को ₹3500 की राशि दी गई तथा नर्सिंग स्टाफ द्वारा भी अलग से धनराशि मांगी गई। इतना ही नहीं, अस्पताल से छुट्टी के समय टांके काटने जैसी नियमित शासकीय सेवा के लिए भी ₹100 लिए जाने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित परिवार ने इसे गरीब और जरूरतमंद मरीजों के साथ आर्थिक शोषण बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ एवं संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की है।


*प्रसूति वार्ड में नवजात को चूहे ने काटा, अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल*

दूसरी घटना शासकीय सिविल अस्पताल गाडरवारा से सामने आई है, जहां ग्राम नांदनेर निवासी अर्पित पाठक ने शिकायत कर बताया कि उनकी पत्नी कुमकुम पाठक ने 30 मई 2026 को अस्पताल में पुत्री को जन्म दिया था। प्रसव के बाद मां और नवजात बच्ची चिकित्सकीय निगरानी में भर्ती थीं। परिजनों के आरोप के अनुसार इसी दौरान नवजात बच्ची के हाथ को चूहे ने काट लिया, जिससे उसे चोट पहुंची। एक नवजात, जो स्वयं अपनी सुरक्षा नहीं कर सकती, उसका अस्पताल जैसे सुरक्षित स्थान पर इस प्रकार की घटना का शिकार होना अस्पताल की साफ-सफाई, चूहा नियंत्रण एवं मरीज सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

परिजनों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कर अस्पताल प्रबंधन, संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं सफाई व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने तथा उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।

*स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर उठ रहे बड़े सवाल*

दोनों घटनाओं के सामने आने के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ सरकारी अस्पतालों में प्रसूता महिलाओं को निशुल्क उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, तो दूसरी तरफ इलाज के नाम पर कथित धन वसूली के आरोप सामने आ रहे हैं। वहीं नवजात की सुरक्षा से जुड़ी घटना ने अस्पतालों की साफ-सफाई और निगरानी व्यवस्था पर भी चिंता बढ़ा दी है।

दोनों मामलों की शिकायत मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, स्वास्थ्य आयुक्त, स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक, संभागीय स्वास्थ्य अधिकारियों, कलेक्टर नरसिंहपुर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई है।

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।