जन्म-मृत्यु शाखा में बड़ा घोटाला? महीनों से जांच जारी, फिर भी कार्रवाई शून्य — जिला प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

1000640621

जन्म-मृत्यु शाखा में बड़ा घोटाला? महीनों से जांच जारी, फिर भी कार्रवाई शून्य — जिला प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

नरसिंहपुर जिला अस्पताल की जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र शाखा एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। इस शाखा से जुड़े एक संदिग्ध मामले में पिछले कई महीनों से जांच जारी है, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में एक ऐसे व्यक्ति के नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिसकी वास्तविकता ही संदेह के घेरे में है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि संबंधित व्यक्ति का अस्तित्व ही संदिग्ध है, ऐसे में यह प्रमाण पत्र किन परिस्थितियों में जारी किया गया, यह बड़ा सवाल बन गया है।

 मामला क्या है?

प्राप्त जानकारी के अनुसार कमल जोशी नामक व्यक्ति के नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिसमें उल्लेख है कि उनकी मृत्यु जिला अस्पताल में हुई। लेकिन जब इस मामले की गहराई से जांच की गई, तो कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और प्रक्रियाएं गायब पाई गईं।

  • मरीज की भर्ती से संबंधित कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं
  • ओपीडी पर्ची और वार्ड में भर्ती का विवरण अस्पष्ट
  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट का कोई रिकॉर्ड नहीं
  • मृत्यु के कारण का प्रमाण उपलब्ध नहीं

इतना ही नहीं, पुलिस विभाग द्वारा भी यह जानकारी दी गई कि संबंधित व्यक्ति का पोस्टमार्टम जिला अस्पताल में नहीं हुआ। ऐसे में यह पूरा मामला और भी संदिग्ध हो जाता है।

 महीनों से जांच, लेकिन कार्रवाई नहीं

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे मामले की जांच पिछले कई महीनों से चल रही है, लेकिन अब तक किसी भी अधिकारी या कर्मचारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ शिकायत की गई थी, वह आज भी उसी जन्म-मृत्यु शाखा में कार्यरत है और उसी तरह काम कर रहा है। इससे यह आशंका और भी मजबूत होती है कि कहीं जांच को जानबूझकर धीमा तो नहीं किया जा रहा।

 जनसुनवाई में शिकायत और जांच टीम का गठन

यह मामला 23 दिसंबर 2025 को जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर महोदय/मैडम के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर द्वारा तत्काल एक जांच टीम गठित की गई थी।

गठित जांच टीम ने जिला अस्पताल की जन्म-मृत्यु शाखा का स्थल निरीक्षण कर दस्तावेजों एवं रिकॉर्ड की जांच भी की थी। प्रारंभिक स्तर पर छानबीन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अब तक न तो कोई अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है और न ही किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।

इस स्थिति ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है और शिकायतकर्ता तथा स्थानीय लोगों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।

 प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। न ही यह बताया गया है कि जांच किस स्तर पर पहुंची है और कब तक कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और पारदर्शिता बेहद आवश्यक होती है, क्योंकि यह सीधे जनता के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा होता है।

img
Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।