सोशल मीडिया पर 'वायरल गर्ल' के नाम से मशहूर मोनालिसा भोंसले और फरमान खान की शादी का गुब्बारा फूट गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की बिजली जैसी तेज जांच में सनसनीखेज खुलासा हुआ है

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सोशल मीडिया पर 'वायरल गर्ल' के नाम से मशहूर मोनालिसा भोंसले और फरमान खान की शादी का गुब्बारा फूट गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की बिजली जैसी तेज जांच में सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि जिस मोनालिसा को बालिग बताकर दुनिया के सामने पेश किया गया, वह असल में मात्र 16 साल की नाबालिग है। आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के निर्देश पर हुई इस जांच ने महज 72 घंटों में केरल से लेकर मध्य प्रदेश तक फैले झूठ के जाल को बेनकाब कर दिया। महेश्वर के सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ था, जिसके मुताबिक शादी के वक्त उसकी उम्र मात्र 16 साल 2 महीने थी।

इस खुलासे के साथ ही फरमान खान की मुश्किलें पहाड़ जैसी हो गई हैं। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर थाने में उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट, एट्रोसिटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संगीन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में यह भी सामने आया कि महेश्वर नगरपालिका से गलत जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर इस अवैध विवाह को कानूनी जामा पहनाने की साजिश रची गई थी। पारधी जनजाति समुदाय से ताल्लुक रखने वाली इस नाबालिग बेटी के मामले में अब 'लव जिहाद' के नैरेटिव को झुठलाने के लिए वैश्विक स्तर पर रची गई एक गहरी रणनीतिक कोशिश की बू आ रही है।

अधिवक्ता प्रथम दुबे ने आयोग के समक्ष यह गंभीर मुद्दा उठाया कि इस विवाह के पीछे केरल के कुछ राजनीतिक नेताओं और कट्टरपंथी संगठनों का हाथ हो सकता है। आरोप है कि यह शादी महज एक निजी रिश्ता नहीं, बल्कि एक खास एजेंडे के तहत 'फॉल्स नैरेटिव' सेट करने की कोशिश थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है और 22 अप्रैल 2026 को केरल व मध्य प्रदेश के डीजीपी को दिल्ली मुख्यालय तलब किया है। केंद्र सरकार को भेजी जा रही विस्तृत रिपोर्ट में इस पूरे प्रकरण में शामिल संगठनों की भूमिका की जांच की मांग की गई है, जिससे आने वाले दिनों में कई बड़े चेहरों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। 

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Satendra Mishra

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