नरसिंगपुर नाफेड की PSS खरीदी पर फिर उठे सवाल: NCML कम्पनी के सर्वेयरों और सुपरवाइजर पर अनियमितताओं के आरोप, गोदामों की जांच की मांग
- bySatendra Mishra
- 23 Jul 2026, 05:59 PM
- 5 Mins
नाफेड की PSS खरीदी पर फिर उठे सवाल: NCML कम्पनी के सर्वेयरों और सुपरवाइजर पर अनियमितताओं के आरोप, गोदामों की जांच की मांग
नरसिंहपुर। जिले में पूर्व में नाफेड के माध्यम से प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के अंतर्गत फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीओ) के जरिए की गई व्यावसायिक चना, मसूर एवं तुअर खरीदी एक बार फिर चर्चा में है। इस खरीदी प्रक्रिया में कार्यरत एनसीएमएल कंपनी के कुछ सर्वेयरों एवं एक सुपरवाइजर पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, खरीदी के दौरान गुणवत्ता परीक्षण और स्कंद स्वीकृति की प्रक्रिया में कथित रूप से भारी लापरवाही एवं अनियमितताएं हुईं। आरोप है कि तत्कालीन सुपरवाइजर विमलेश साहू ने कुछ स्थानीय व्यापारियों के साथ मिलीभगत कर कथित रूप से बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ पहुंचाने का कार्य किया। आरोप यह भी है कि खरीदी के दौरान गुणवत्ता मानकों के विपरीत मिट्टी एवं अन्य अशुद्धियों से युक्त अमानक स्कंद को भी स्वीकृत कर गोदामों में भंडारित कराया गया।
सूत्रों का यह भी दावा है कि बाद में मामले को वैध ठहराने अथवा रिकॉर्ड में दर्ज करने के उद्देश्य से एक पंचनामा तैयार किया गया, जिसमें गोदाम में अमानक स्कंद पाए जाने का उल्लेख किया गया। और गौदाम मेनेजर को अमानक स्कंद रखने और लाभ कमाने की कहानी रची गई थी हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि उस पंचनामा के आधार पर संबंधित अधिकारियों या एजेंसियों द्वारा क्या कार्रवाई की गई।
आरोप लगाने वालों का कहना है कि यदि आज भी संबंधित गोदामों, विशेषकर गाडरवारा स्थित मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन के भंडारण स्थलों का निष्पक्ष वीडियो ग्राफी के साथ निरीक्षण और गुणवत्ता विशेषज्ञो से जांच कराया जाए, तो कथित रूप से भारी मिट्टीयुक्त एवं अमानक स्कंद के साक्ष्य सामने आ सकते हैं। उनका कहना है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खरीदी प्रक्रिया में गुणवत्ता मानकों का पालन हुआ था या नहीं।
ध्यान दें: उपरोक्त समाचार में वर्णित आरोप संबंधित सूत्रों एवं पंचनामा पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए। यदि सक्षम जांच एजेंसी द्वारा जांच की जाती है, तो उसी के निष्कर्ष अंतिम माने जाएंगे।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
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